Sunday, 30 July 2017

Sab Tu Hai (Kalma, Namaz, Azaan) - Anuj Pareek

इश्क़ तेरा अज़्मत है
इबादतों की मसर्रतें है तू
खुदा तू खुद है मेरे लिए
कलमा, नमाज़, अज़ान सब तू है मेरे लिए
© अनुज पारीक

Ishq Tera Azmat Hai
Ibadaton ki masrarten hai Tu
Khuda Tu Khud hai mere liye
Kalma, Namaz, Azaan Sab Tu Hai Mere Liye --  © Anuj Pareek 

Khalwat - Anuj Pareek


हर मर्ज़ को मुस्कुराकर छुपाता हूँ
अपनों की भीड़ में भी अक्सर खुद को ख़ल्वत में पाता हूँ 
अनुज पारीक 

My Aim Is My BEER - Anuj Pareek

My AIM Is My BEER -- Anuj Pareek
Motivational Quotes
My Quote
My WORD Is My WORLD
DhunZindagi

Wednesday, 26 July 2017

Zabt Kaha Rahta hai Insan me - Anuj Pareek



जुनून हो चाहे कितना भी इंसान में
लाख जतन पर भी ना मिले मंज़िल
तो ज़ब्त कहां रहता है इंसान में
                      - अनुज पारीक 

Dhun Raksha Ki

जिनमे होती है धुन ... धुन बचाव की, धुन रक्षा की। ऐसे वीर जाबांज़ सैनिकों को सलाम।
#KargilVijayDiwas
धुन बचाव की
DhunZindagi




Monday, 24 July 2017

Urdu Poetry Kalma Namaz Azaan -- Anuj Pareek




कलमा, नमाज़, अज़ान सब तू है मेरे लिए -- अनुज पारीक 


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Sunday, 23 July 2017

Kalma Namaz Azaan -- Anuj Pareek

इश्क़ तेरा अज़्मत है    
खुदा तू खुद है मेरे लिए - अनुज पारीक
इबादतों की मसर्रतें है तू।
खुदा तू खुद है मेरे लिए 
कलमा, नमाज़, अज़ान सब तू है मेरे लिए।
             ©अनुज पारीक 
                                         

Friday, 21 July 2017

HMI (Human Machine Interface)

Medium to Interface = Human Machine Interface
manual instruction to convert results by HMI

HMI (Human Machine Interface) is a medium for information exchange and mutual communication between electromechanical system's and the user. It allows the user to complete settings through touchable images or keys on the user-friendly window. This not only offer's fast and convenient control of manufacturing automation, but also has replaced traditional controlling panel's which needextensive wiring.

HMI Example -- Mobile Phone, AC, Microwave, Washing Machine, Lift & many more electomechnical devices whose working on behave manual command or instruction

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तकनीक है तो तरक्की है - अनुज पारीक (धुन ज़िन्दगी की)


Technique Opens the way of Progress - Anuj Pareek (Dhun Zindagi Ki )



 

Tradition Love - Anuj Pareek









Love Shyari
Urdu poetry
Urdu Shyari
Explanation Love
Tradition Love
Poetry
Dhun Kavita ki
धुन ज़िन्दगी की
धुन कविता की

इश्क़ की तशरीह / Love Tradition , Explanation - Anuj Pareek



इश्क़ की क्या तशरीह दूँ
दिल तोड़ना तो रिवायत सी हो गई है -- Anuj Pareek
तशरीह - व्याख्या (Explanation)
रिवायत - परम्परा (Tradition)

Thursday, 20 July 2017

Khaab - Anuj Pareek



KHAAB- ANUJ
झूठा ही सही ख़्वाब अच्छा है 
ज़िन्दगी तेरा साथ अच्छा है। 
AnujPareek 
DhunZindagi 

Friday, 14 July 2017

Aashna Se Adawat - Anuj Pareek

आशना से अदावत -- अनुज पारीक

लो मान भी लिया 
बड़े मसरूफ़ रहते होंगे आप
लेकिन ये क्या आशनाओं से अदावत
और फेसबुकियों से बात
-- अनुज पारीक--



आशना -- परिचित 
अदावत -  वैर 
मसरूफ़ -  व्यस्त, busy 

Wednesday, 12 July 2017

SCADA / Supervisory Control and Data Acquisition / Automation

SCADA ---  Supervisory Control and Data Acquisition offers the ease of Monitoring of Sensors placed at distances, from one central location

The task of supervision of machinery and industrial processes on a routine basis can be an excruciatingly tiresome job. Always being by the side a machine or being on a 24x7 patrol duty around the assembly line equipment checking the temperature levels, water levels, oil level and performing other checks would be considered a wastage of the expertise of the technician on trivial tasks.

Supervisory Control first evolved in Electric utility systems when a need to operate remote substation equipment without sending in personnel or line crew at the remote site was felt.
General Electric and Control Corporation too developed their own independent supervisory control programs. These were used in pipelines, gas companies and even airports for runway landing lights. These systems became popular during 1950 and 1965. By that time, i.e. in 1960s Telemetry was developed for monitoring purposes.

Elements of SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition)

SCADA monitors, controls and alarms the plant and/or regional facilities’ operating systems from a centralized location. It includes the communication of information between a SCADA central host computer, many scattered units and/or Programmable Logic Controllers.

SCADA Master Station Computer Systems: It is the repository of the real-time or near real-time reported data collected from the remote terminal units connected to it. It is generally standard computer hardware equipment and very few SCADA system suppliers have ventured out to make their own computer equipment. A few companies like IBM and CDC did try making hardware for it, but the effort was short lived and commercial off-the-shelf computer products continue to be the main stay. The back end SCADA software must be able to repeatedly poll the RTUs for data values, should have software for their retrieval, storage and processing. The processing may include unit conversion, cataloguing into tables etc.

Human-Machine Interface: 

This is the eye candy part on the host station. The values that have been stored in the host computers are presented to the human operator in an understandable and comprehensible form using HMIs. These may provide trending, diagnostic or management information and detailed schematics and animations representing the current states of the machines under its control. Pictorial representation being more understandable to humans is the preferred form in SCADA HMIs. 




खून खोल देने वाली कविता


खून खोल देने वाली कविता 


AmarnathAttack 
AmarNathTerrorAttack
Terrorism


                                   

दरिन्दों को कब इनकी भाषा में समझाओगे -- अनुज पारीक

दरिन्दों को कब इनकी भाषा में समझाओगे -- अनुज पारीक 

जो चैन अमन का पाठ पढ़ाते उन्हीं पर हुई है गोलीबारियां
कब तक, कब तक इनसे यूं पेश आओगे 
क्या कभी कोई सख्ती भी अपनाओगे 
समझाओं अब इनको इन्हीं की भाषा में 
दोस्ती, भाईचारा कब तक अपनाओगे
ये दरिंदे यूं ही छलनी करते रहेंगे सीना हमारे जवानों का 
या फिर उन निहत्थे निर्दोष इंसानों का 
और कब तक, कब तक कड़ी निंदा जताओगे 
इनको इन्हीं की भाषा में कब समझाओगे 

अनुज पारीक 
धुन ज़िन्दगी की 

Tuesday, 11 July 2017

Monday, 10 July 2017

Main Cigret To Nahi Peeta / मैं सिगरेट तो नहीं पीता -- अनुज पारीक

मैं सिगरेट तो नहीं पीता
हां मगर कुछ कश लेता हूँ सुकून के
---- © अनुज पारीक 

Saturday, 8 July 2017

I do not write for money - Anuj Pareek





                                                       मैं नहीं लिखता पैसों के लिए - अनुज पारीक 

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Saturday, 1 July 2017

पागल कवि - कौतुहल मेरे मन की /PagalKavi

ज़िन्दगी क्या है ?
हम सब के मन में ये बात कभी ना कभी ज़रूर आती  है। या और भी कई ऐसे सवाल जो हमे ना सिर्फ परेशान बल्कि झकझोर कर देते हैं। सवालों में तो वैसे हर वक़्त उलझे रहते हैं। पर एक ऐसा सवाल जो हमे कई दफ़ा परेशान करता है और सोचने पर भी मज़बूर।
खासतौर पर तब जब हम किसी परेशानी में फंसे हो,जब जीवन दुखदायी हो।
कहीं से कोई उम्मीद की रोशनी दिखाई ना दे ऐसे समय में अक्सर हम इस सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश करते हैं, की आखिर ये ज़िन्दगी है तो है क्या?
और जब ज़हन में ऐसे सवाल घर कर जाते हैं तो दिलों दिमाग के सारे घोड़ें दौड़ने लगते हैं।
ऐसे ही कई सवालों ने घेरा बना लिया था उस पागल कवि के मन में ........
तो आइये दोस्तों धुन ज़िन्दगी पर आज हम जानेंगे
ऐसे ही सवालों के जवाब क्योकि धुन ज़िन्दगी पर
मैं आपका दोस्त अनुज पारीक लेकर आता हूँ।
जानकारी का खज़ाना और भी बहुत कुछ ....
साथ ही आपको रुबरु करवाता हूँ। धुन संवार लोगों से
क्योकि ज़िन्दगी में किसी मुक़ाम तक जाना हो या किसी भी मंज़िल को पाना हो ज़रूरी है।
धुन.... धुन ज़िन्दगी की ..
तो आइए जानते हैं "कौतुहल मेरे मन की"


दरअसल ये कौतुहल सिर्फ मेरे मन की नहीं है।
ये हर उस इंसान के मन की है जो ज़िंदा है और ढूंढने की कोशिश करता है इन सवालों के जवाब...
उस रात, उस लेखक की परछाईं अधपकी नींद से उठ खड़ी हुई। बगल में कलम पड़ी थी।
दिलों-दिमाग पर शब्दों और ख़्यालों का पहरा लगा था।  फिर क्या था, उसके ‘मन की कौतुहल’ में एक रवानी जागी। उसके उबलते शब्दों ने आखिरकार लिख ही डाला।
वो दिल्ली का दर्द,  वो मांझी का मर्ज़, वो उस अहंकारी मानव का सच, वो उस श्मशान की बुझी ख़्वाहिश, वो उस ज़िद्दी धुआँ की फ़रमाइश,
वो उस दिवाली की अंधेरी रात, वो उस सन-सैतालिस की बेबस बात, वो उस प्यासे कवि की गुहार,
वो उस कल्करूपी की पुकार, वो उस आशिक की ज़रूरत,  वो उस नोटबन्दी की हुकूमत, वो उस रेलगाड़ी के तमाशे, वो उस सड़क पे पड़ी खूनी लाशें।
वो मानवीय भावनाओं की सिसिकियों के भँवर में जा फँसा था। शब्दों का समुंदर उसके गले तक जा भरा था। उन कड़वे और ज़हर शब्दों की उल्टियाँ करना बेहद ही ज़रूरी था। यह काव्य-रचना ज़रूरी थी। उस ''पागलकवि की कल्पना" के रसद को चखना जरूरी था।
अब तो आप जान ही चुके होंगे वो सवाल जो उस पागल कवि के मन में थे। लेकिन हां अभी भी जवाब
बाकी है और जवाब मिलेंगे आपको पागल कवि कल्पना के रसद को चखने के बाद ...
तो आज ही आर्डर करें अमित सिंह द्वारा लिखी
"कौतुहल मेरे मन की"

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Infibeam 



Book Review by
ANUJ PAREEK
(Radio Presenter, Creative Writer, Poet)

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