Friday, 28 October 2016

Dhun Zindagi Ki Wishes EveryOne a Very Happy Deepawali

आशा,उल्लास और उमंग  का  दीपक हमेशा आपके जीवन में जलता  रहे ,
असंख्य  दीपमालाएं आपके जीवन  की हर राह को आलोकित करे
रोशनी के इस पावन पर्व पर आपको ढेरो शुभकामनाएं
  हँसते रहिए मुस्कुराते रहिए !
Keep Reading Dhun Zindagi Ki
Anuj Pareek 
Dhun Zindagi Ki 

Thursday, 27 October 2016

Wish you A Very )(appy Dhanteras

धन के देवता कुबेर और धन की देवी लक्ष्मी की सदा आप सभी पर कृपा बनी रहे 
आपके जीवन में सदा खुशियों की बहार हो और आपका जीवन यू ही जग मग रोशन रहे 
शुभकामनाएं
                      Dhun Zindagi Ki 
)(appy Dhanteras

Wednesday, 26 October 2016

Bali Ka Bakra (बलि का बकरा)

बिस्किट की क्रीम बॉस, यहा हाथ आता है तो कोरा बिस्किट / बलि का बकरा : अनुज पारीक

एक मूवी देखते हुए एक COMEDY ARTIST के JOKE पे ग़ौर किया 
उसपे थोड़ा सोचा तो एक बात निकलकर सामने आई 
दरअसल एक NEW EMPLOYEE दवारा मीटिंग मे दिए गये सुझाव को सराहा गया और उस EMPLOYEE की खूब तारीफ़ की गयी  , 
 EMPLOYEE KUSH BOSS PUSH
यानी आइडिया विदाउट फिल्टर हुए  डाइरेक्ट मीटिंग मे रख दिया जाए तो बॉस के रिएक्शन तो देखने लायक ही होंगे
और ठीक हुआ भी एसा ही और रील से हटकर रियल लाइफ मे झाकने की कोशिश करे तो उन बाकी एम्पॉलयस के साथ भी यही होता है 

जो भी हो बॉस के रिएक्शन बड़े कमाल के होते है 

क्यो बे .. तू ज़्यादा समझदार है क्या ? 
अगर ज़िंदगी मे आगे बड़ना है अपने सीनियर की Respect  करो 
खेर छोडो आगे से कोई भी आइडिया बताने से पहले मेरे साथ Share कर लिया करो 

मजबूरी एम्पलोई की
बिस्किट की क्रीम बॉस, यहा हाथ आता है तो कोरा बिस्किट 

यही तो होता है, होता भी यही है 
काम कोई करे क्रेडिट कोई और साला हाथ वही बिस्किट 
सुबह बन ठन पूरे जोश जुनून के साथ दिन भर काम फिर शाम को चूसे हुए आम की तरह ऑफीस से घर 
 दौड़े कोई और CREDIT  कोई और ले जाता है 
बोनस प्रमोशन तो हाथ आता नही फिर वही एक चारा REVITAL  जियो जी भर के.......
आख़िर क्यो Management  को नही दिखता ..Organization के लिए कौन  समर्पित है !

 लेकिन बलि का बकरा बेचारा एम्पलोई बन जाता है ठीक उसी बकरे की तरह  


Well बकरे से एक कहानी याद आई !



एक बार एक किसान का घोडा बीमार हो गया। उसने घोड़े के इलाज के लिए डॉक्टर को बुलाया।
डॉक्टर ने घोड़े को देखा और बोला "आपके घोड़े को काफी गंभीर बीमारी है। हम तीन दिन तक इसे दवाई देकर देखते हैं, अगर यह ठीक हो गया तो ठीक नहीं तो हमें इसे मारना होगा। क्योंकि यह बीमारी दूसरे जानवरों में भी फ़ैल सकती है।"

यह सब बातें पास में खड़ा एक बकरा भी सुन रहा था।

अगले दिन डॉक्टर आया, उसने घोड़े को दवाई दी चला गया। उसके जाने के बाद बकरा घोड़े के पास गया और बोला, "उठो दोस्त, हिम्मत करो, नहीं तो यह तुम्हें मार देंगे।"

दूसरे दिन डॉक्टर फिर आया और दवाई देकर चला गया।

बकरा फिर घोड़े के पास आया और बोला, "दोस्त तुम्हें उठना ही होगा। हिम्मत करो नहीं तो तुम मारे जाओगे। मैं तुम्हारी मदद करता हूँ। चलो उठो"

तीसरे दिन जब डॉक्टर आया तो किसान से बोला, "मुझे अफ़सोस है कि हमें इसे मारना पड़ेगा क्योंकि कोई भी सुधार नज़र नहीं आ रहा।"


जब वो वहाँ से गए तो बकरा घोड़े के पास फिर आया और बोला, "देखो दोस्त, तुम्हारे लिए अब करो या मरो वाली स्थिति बन गयी है। अगर तुम आज भी नहीं उठे तो कल तुम मर जाओगे। इसलिए हिम्मत करो। तुम्हे उठना होगा दौड़ना होगा 
बकरे की बातों से घोड़ा मोटीवेट हो जाता और खड़े होने की कोशिश करता है और दौड़ने लगता है .
ये सब किसान देख कर खुशी के मारे झूम उठता है चिल्लाने लगता है मेरा घोड़ा ठीक हो गया .
ये तो "चमत्कार हो गया।  अब तो जश्न होगा पार्टी होगी  आज बकरे का मीट का खाएँगे !

ठीक एसे ही Management की आँखो पर भी पट्टी बँधी रहती है 

वो ये देखने की कोशिश नही करते आख़िर घौड़ा दौड़ा कौन  रहा है !.........
                                                                              Anuj Pareek (Dhun Zindagi Ki)

Monday, 24 October 2016

Dhun Zindagi Ki - One Line Story by Anuj Pareek

·        ख्वाहिशों के दाने

आशा की एक किरण जीने की एक राह...

वो मकसद ज़िन्दगी का बदल गया

हंस कर सहे हर दर्द तेरे

अलग है कुछ मेरे दिल की कहानी...

KOSHISH by Anuj Pareek

                                                   " कोशिश "
Anuj Pareek 
हर इंसान को किए का मिलता है 
कोशिश करने वाले को फल तो मिलता है 
अगर करता है कोई काम में विश्वास 
चाहत तो क्या उम्मीद से दुगुना मिलता है 
वो जो कहते है किस्मत नहीं देती साथ हमारा 
उनसे कह दो कर्म तो कर फल जरूर मिलता है 
हाथ पे हाथ धरने से नहीं होगा काम तुम्हारा 
काम लेना सीख ले अपने हाथ की लकीरो से 
फिर देख मुक्कदर तेरा कैसे नहीं बनता है 
हे राह के राही करता रहे निरन्तर कोशिश 
 फिर देख खुदा क्या करता है 
कोशिश करने से ही होगी मुश्किलें आसा तेरी 
  बता बिना कोशिश हुई है कभी कोई कहानी पूरी !
                                                                                                                                                           अनुज पारीक 
                                                                                               

Saturday, 22 October 2016

One line by Anuj Pareek - Dhun Zindagi Ki




              
One line by Anuj Pareek- Dhun Zindagi Ki 


·        ज़िन्दगी चल ना ख्वाबों से मेरे ... 
       
·        ज़िन्दगी  एक  संगर्ष  है  और  मेरी  कहानी  इससे  कुछ  ज्यादा 
·       
  मुझे मत रोको अपनी उड़ान से उड़ने दो मुझे खुले आसमान में 
·       
 
पहचान के मायने तो तब बदलते है जब मुलाकात कामयाबी से हो



·        One line by Anuj Pareek- Dhun Zindagi Ki 

·        #AnujPareek #DhunZindagiKi #OneLine 


Thursday, 20 October 2016

Journey Of Sanjay Shaferd On Cycle

कहते है ज़िन्दगी में किसी मुकाम को पाने 
या फिर किसी तलाश को पूरा करने के लिए धुन का होना जरूरी है
और जब होती है धुन सवांर तो बिना किसी परवाह किये निकल पड़ते है राही मंज़िल की तलाश में
ये तलाश कभी अपने लिए तो कभी अपनों के लिए , लेकिन जब ये तलाश  किसी  साहित्यकर्मी की हो तो बात अपने लिए , अपनों के लिए तक ही सीमित नहीं बल्कि  समाज के लिए होती है .
जी हां दोस्तों एक ऐसी ही तलाश से रूबरू होंगे आप 
धुन ज़िन्दगी की ...
कविता और साहित्य प्रेम से लोगो के दिलों में एक खास जगह बना चुके संजय शेफर्ड 
अपने जीवन के बेहद ही रोमांचक यादगार सफर पर निकल रहे है
ये सफर राइडिंग फॉर पोएट्री अभियान  पुरे एक माह का होगा जो कि नवम्बर महीने से शुरू होगा
एक माह की इस यात्रा के दौरान  उत्तराखंड के कई जिलों में कई पड़ताल भी करना चाहते है संजय शेफर्ड
इस सफर का मुख्य उद्देश्य ट्रेडिशनल मेडिसिन, डार्क टूरिज्म, ब्लैक टूरिज्म, ग्रेव टूरिज्म और सेक्स टूरिज्म जैसी  चीजों की खोज  करना समाज में हो रही गतिविधियों को देखना समझना है .
तो आइए जानते है इस सफर से जुडी तमाम जानकारियां किताबनामा और हिंदी स्टूडियो के संस्थापक संजय शेफर्ड से ...
कब शुरू होगी यात्रा , इस यात्रा में क्या खास होगा और क्या इस सफर का उद्देश्य है ?
नवम्बर महीने से एक माह की यह यात्रा शुरू होगी.साइकिल से इस साहित्य यात्रा पर निकल रहा हूं. इस दौरान उत्तराखण्ड के सभी 13 जिलों में साहित्य, संस्कृति और समाज को जानने- समझने का प्रयास करूंगा. हालांकि उत्तराखंड का मैं 2-3 बार स्टेट- कोऑर्डिनेटर रह चुका हूं, वहां के जन- जीवन और संस्कृति से भलीभांति वाक़िब हूं. बावजूद इसके वहां अभी भी समझने के लिए बहुत कुछ बाकि रह गया था जिसे अब पूरा करने जा रहा हूं. मैं वहां के कला एवं साहित्य जगत से जुड़े लोगों से मिलूंगा, उनके जन्मस्थान पर जाकर कुछ समय व्यतीत करूंगा. ट्रेडिशनल मेडिसिन, डार्क टूरिज्म, ब्लैक टूरिज्म, ग्रेव टूरिज्म और सेक्स टूरिज्म जैसी अकल्पनीय चीजों की खोज करूंगा. विभिन्न (13 ) नवोदय विद्यालयों में जाकर अपने छोटे भाई बहनों से मिलूंगा. उनकी हिन्दी को अपनी नई वाली हिन्दी की मुलाक़ात करवाऊंगा. उन्हें दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे महिला हिंसा, तेजाब हमलों से अवगत कराऊंगा और आलोक भाई, आशीष बाबा, लक्ष्मी के कैम्पेन स्टॉप एसिड अटैक के बारे में बताऊंगा. असीम भाई उस समय यूरोप के किसी देश में होंगे पर बातचीत होती रहेगी.
मेरे पास से इस दौरान मेरे एटीएम, डेविट कार्ड, क्रेडिट कार्ड सब छीन लिए जायेंगे. कुछ कैश होगा जो एक हजार से भी कम होगा. मिलना दुर्लभ होता है पर मैंने वाइल्ड फ्रूट और वेजिटेबल की सारी जानकारी रख ली है. कुछ कांटेक्ट भी निकाल लिए हैं. सारे लोग मेरे संपर्क में सोशल मीडिया पर बने रहेंगे. मुझे दिन में यात्रा करनी होगी. रातें किसी गांव- देहात या घाटी में खुले आसमान के नीचे टेंट में बितानी होगी. बैकअप के लिए प्रदेश के सभी जिला पर्यटन अधिकारी और सरकारी टूरिस्ट सेंटर मेरे सहयोगी होंगे. वह मुझसे मुलाकात के आलावा और कोई मदद नहीं कर सकेंगे. मेरा बैगपैक 12 किलोग्राम का होगा. जिसमें तीन जोड़ी कपडे, एक कैमरा, एक सटेलाइट फोन, एक लैपटॉप, टेंट, स्लीपिंग बैग, टार्च, रस्सी, हुक्कस, पानी की बोतल, कुछ जरुरी मेडिसिनस, हाई- बर्ड की तीन साइकल्स, और ढेर सारी दोस्तों की दुआएं होंगी

मेरी इस यात्रा को जेएनवी के 6 लाख स्टूडेंट सुपोर्ट करेंगे. वर्ल्ड की सबसे बड़ी स्टूडेंट एलुमनी All India JNV Alumni Association का सहयोग होगा. महेन्द्र, पुष्पेंद्र और सुरेश राठी जो मेरे बड़े भाई के समान हैं उनका मार्गदर्शन बीच- बीच में मिलता रहेगा. आप लोग भी अपना सहयोग बनाए रखें. खासकर उत्तराखंड के लोग मुझे होस्ट कर सकते हैं. मुझसे मिलकर कविताएं सुन सकते हैं. साहित्यिक चर्चा कर सकते हैं. किसी साहित्कार से मिलने के लिए सजेस्ट कर सकते हैं. इतने सारे काम एक माह में पूरा करना है. कविताएं लिखनी है. कुछ आर्टिकल लिखने हैं और दुनिया के लोगों के साथ अपडेट भी रहना है. तस्वीर,कविता और कहानी के साथ .
अनुज पारीक
(धुन ज़िन्दगी की)